ग्यारस क्या होती है? – एक सरल और रोचक जानकारी
हमारे घरों में अक्सर सुनने को मिलता है – “आज ग्यारस है, व्रत रखना है” या “कल ग्यारस की कथा सुननी है”। लेकिन सच में ग्यारस क्या होती है? आइए इसे बहुत ही आसान और दिल से समझते हैं।
ग्यारस का मतलब और नाम
ग्यारस दरअसल एकादशी तिथि का ही आम बोलचाल वाला नाम है। संस्कृत में “एकादशी” का मतलब होता है “ग्यारहवाँ”। हिंदू पंचांग में चंद्रमा की तिथियों के हिसाब से हर महीने में शुक्ल पक्ष (चांद बढ़ने वाला) और कृष्ण पक्ष (चांद घटने वाला) – दोनों में 11वीं तिथि को एकादशी कहते हैं। यही एकादशी उत्तर भारत, खासकर ग्रामीण इलाकों और वैष्णव परिवारों में प्यार से ग्यारस कहलाती है।
तो सीधे शब्दों में: ग्यारस = एकादशी तिथि (जब चंद्रमा की 11वीं तिथि होती है, उसे हम ग्यारस बोलते हैं।)
ग्यारस का धार्मिक महत्व
हिंदू धर्म में ग्यारस का दिन भगवान विष्णु को बहुत प्रिय माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और भगवान विष्णु की पूजा करने से:
- पिछले जन्मों के पाप नष्ट होते हैं
- मन की अशांति दूर होती है
- इंद्रियों पर नियंत्रण बढ़ता है
- धन, स्वास्थ्य, सुख-शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है
पुराणों में कहा गया है कि एकादशी (ग्यारस) का व्रत इतना पुण्यदायी है कि यह हजारों यज्ञों के बराबर फल देता है। पद्म पुराण में भगवान कृष्ण ने युधिष्ठिर को बताया था कि ग्यारस का व्रत सभी तापों (शारीरिक, मानसिक, आध्यात्मिक) से मुक्ति दिलाता है।
साल में कितनी ग्यारस आती हैं?
हर महीने 2 ग्यारस आती हैं:
- शुक्ल पक्ष की एकादशी
- कृष्ण पक्ष की एकादशी
इस तरह पूरे साल में 24 ग्यारस (एकादशी) होती हैं। कुछ खास ग्यारस बहुत प्रसिद्ध हैं जैसे:
- जया ग्यारस
- विजया ग्यारस
- अमलकी ग्यारस
- निर्जला ग्यारस (सबसे सख्त व्रत)
- देवशयनी ग्यारस (चातुर्मास की शुरुआत)
- दोल ग्यारस (खास उत्सव वाली)
ग्यारस के दिन क्या करते हैं?
ज्यादातर लोग ग्यारस पर व्रत रखते हैं। व्रत दो तरह का होता है:
- पूर्ण व्रत – अनाज (गेहूं, चावल, दाल आदि) नहीं खाते, सिर्फ फल, दूध, मखाना, साबूदाना, आलू, शकरकंद आदि सात्विक चीजें खाते हैं।
- फलाहार/पार्थ व्रत – हल्का भोजन करते हैं, लेकिन अनाज से परहेज रखते हैं।
ध्यान रखने वाली बातें:
- दशमी (10 तारीख) की रात से ही व्रत की तैयारी शुरू हो जाती है।
- ग्यारस के दिन दांत साफ करने के लिए लकड़ी का दातुन नहीं करते, पत्ते चबाते हैं।
- कुछ सब्जियां जैसे पालक, गोभी, गाजर, शलजम वर्जित मानी जाती हैं।
- शाम को भगवान विष्णु की पूजा, आरती, भजन और कथा सुनना आम है।
- अगले दिन द्वादशी पर व्रत खोलते हैं (पारण)।
क्यों रखते हैं लोग ग्यारस का व्रत?
कुछ लोग इसे धार्मिक मान्यता से करते हैं, कुछ लोग स्वास्थ्य के लिए। आजकल वैज्ञानिक नजरिए से भी देखा जाता है कि चंद्रमा के प्रभाव से उस दिन पेट हल्का रखने से शरीर को detox मिलता है, मन शांत रहता है और आत्म-नियंत्रण बढ़ता है।
तो दोस्तों, अगली बार जब कोई कहे “ग्यारस है”, तो याद रखना – ये सिर्फ एक तारीख नहीं, भगवान विष्णु की कृपा पाने का, मन को शुद्ध करने का और खुद को बेहतर बनाने का खास मौका है।
जय श्री विष्णु! हर ग्यारस आपको शांति, स्वास्थ्य और खुशियां दे। 🙏